” हरिजन ” बोल अमित काॅलोनाइजर लिमिटेड ने किया आवंटन निरस्त – FIR दर्ज

आज़ादी के 70 साल बाद भी जातिवाद के शिकार – अनुसूचित समाज , आखिर कब तक 
मुख्यमंत्री जन आवास योजना में अमित काॅलोनाइजर लिमिटेड (ए.सी.एल.) द्वारा  वाल्मिकी समाज की महिला को हरिजन जाति होने के कारण  जातिगत आधार पर आवंटनशुदा  आवास से किया वंचित –
दिनांक 14 जनवरी 2021 | दलित अधिकार केन्द्र के मुख्य कार्यकारी पी.एल.मीमरौठ एंव राजस्थान वाल्मिकि विकास मंच के अध्यक्ष राकेश वाल्मिकि ने जातिगत आधार पर लाटरी सिस्टम के तहत मुख्यमंत्री जन आवास योजना में आवंटित आवास को जातिगत आधार पर निरस्त करने व जातिगत आधार पर दलित महिला को आवास से वंचित करने की घटना पर त्वरित कार्यवाही कर न्याय की मांग की व् उक्त घटना गहरा आक्रोश व्यक्त किया |
पी.एल.मीमरौठ ने उक्त प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुये मुख्यमंत्री अशोक  गहलोत, अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, अध्यक्ष, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, नई दिल्ली,  शांति धारीवाल मंत्री स्वायत्त शासन, नगरीय विकास विभाग, राजस्थान सरकार, व  निहाल चन्द गोलल , अध्यक्ष, अंचल सम्म्पति नियामक प्राधिकरण, जयपुर (रेरा) को पत्र लिख कर इस मामले में व अमित कोॅलोनाइजर्स लि. व अंचल सम्म्पति नियामक प्राधिकरण, जयपुर (रेरा) के पदाधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही कर पीडित दलित महिला को उक्त येाजना में आवास आवंटित करने की मांग की ।

FIR COPY

गौरतलब हैं  इस प्रकरण में पीडिता ने पुलिस थाना अशोक  नगर जयपुर  (दक्षिण) में अमित काॅलोनाइजर लिमिटेड (ए.सी.एल.) मुख्य एवं पंजीकृत कार्यालय ई-97, रिया, ऐवेन्यू, सुभाष मार्ग, सी-स्कीम, जयपुर के सभी नामजद पदाधिकारियेां के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट सं. 0020/2021 अपराध अन्तर्गत धारा 3 (1) ()ि 3 (1) (प) 3 (1) (त) 3 (1) (्र) 3 (1) (्रब) अनुूसचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधनियम 1989, संषोधन अधिनियम 2015 व धारा 4, 7 नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 के तहत रिपोर्ट दिनांक 13 जनवरी 2021 को दर्ज हो चुकी है।
 प्रकरण का संक्षितप्त तथ्य इस प्रकार हैः- राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक  गहलोत ने आर्थिक दृष्टि से कमजोर, एवं अन्प आय वर्ग के परिवारों के लिए राजस्थान में पहली बार स्वतंत्र आवासीय इन्टीग्रेटेउ टाऊन शिप  योजना शुरू  की गई थी जिसका इस योजना में आवास प्राप्त करने के लिए पीडित दलित महिला माया देवी वाल्मीकी पत्नी सीताराम हरिजन, बाबाजी की छावनी, जय सीयाराम, काॅलोनी, दौसा (राज.) ने दिनांक 28/01/2019 को अमित काॅलोनाइजर लिमिटेड (ए.सी.एल.) मुख्य एवं पंजीकृत कार्यालय ई-97, रिया, ऐवेन्यू, सुभाष मार्ग, सी-स्कीम, जयपुर द्वारा मुख्यमंत्री जन-आवास योजना-2015 के अन्तर्गत विकसित की जा रही परियोजना ए.सी.एल.ग्रीन पार्ट-2, गुप्तेश्वर मन्दिर के पास, लालसोट बाईपास रोड, दौसा में ई.डब्ल्यू.एस. (आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग) यूनिट में 36 वर्ग मीटर का स्वतन्त्र डूपलैक्स विला मकान हेतु आवेदन पत्र प्रस्तुत किया। दिनांक 28/05/2019 उक्त कम्पनी के निदेशक मण्डल की बैठक जयपुर स्थित पंजीकृत कार्यालय में आयोजित हुई जिसमें कम्पनी के नियमानुसार उक्त परियोजना स्थल पर दौसा विघायक एवं नगर परिषद आयुक्त के समक्ष उक्त परियोजना में इ.डब्ल्यू.एस. श्रेणी में प्राप्त किये गये कुल आवेदन पत्रों की लाॅटरी निकाली गई जिसमें मुझे ई.डब्ल्यू एस.-1 यूनिट में यूनिट नं. 74 स्वतन्त्र डूपलैक्स विला क्षेत्रफल 36 मीटर आंवटन किया गया। पीडिता द्वारा उक्त आवास के प्रतिफल स्वरूप लगभग 1.50 लाख रूपये की राषि जमा करवाई गई उसके बाद  दिनांक 03/09/2019 को कम्पनी द्वारा पीडिता के पक्ष में विक्रय इकरारनामा निष्पादित किया गया।
परन्तु दिनांक 07/06/2020 को कम्पनी के पंजीकृत कार्यालय सी-स्कीम जयपुर में निदेशक मण्डल की बैठक आयोजित की गई जिसमें सर्व सम्मति प्रस्ताव पारित किया गया कि आंवटी की जाति हरिजन है और यदि हमने हरिजन जाति की सदस्या को हमारी अवासीय योजना में विला आवंटित किया तो हमारी आवास योजना की साख गिर जायेगी यह तर्क देते हुये  आंवटन शुदा विला को हरिजन जाति होने के दुर्भावनापूर्ण आशय एवं जातिगत भेदभाव के कारण दलित महिला का आवंटन निरस्त कर दिया गया। 
उक्त बैठक में ए.सी.एल. कम्पनी के निदेशक मण्डल में भरोसी मीना निदेशक, भवानी नायक निदेशक, वियज कुमार वर्गीय निदेशक, राजेश विजयवर्गीय निदेशक, अमित विजयवर्गीय निदेशक, अर्चना शर्मा प्रोजेक्ट संयोजक ए.सी.एल. ग्रीन्स पार्ट-2 एवं एच.ओ.डी.नीलम शर्मा, प्रोजेक्ट मैनेजर, ए.सी.एल. ग्रीन्स पार्ट-2 निर्मल शर्मा आथोराइज्ड हस्ताक्षरकर्ता ए.सी.एल. ग्रीन्स एवं साइट सुपरवाईजर, आदि शामिल थे। निदेशक मण्डल के सभी सदस्य भलिभातिं जानते थे कि मैं अनुसूचति जाति की सदस्या हूँ और उपजाति वाल्मिकी (हरिजन) है तथा सभी के द्वारा छल-कपल कर, धोखा-धड़ी करते हुऐ सामान्य आशय को अग्रसर करते हूुए हरिजन जाति का होने के कारण दलित महिला के साथ जातिगत भेदभाव एवं छूआछूत कर पीडिता का आंवटन गैर कानूनी तरके से निरस्त कर दिया है।

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