एक चिता अभी शांत भी नहीं हुई दूसरी की तैयारी – सीवरेज वर्कर , बीना मजदूरी तय करें ही सफाईकर्मी को सीवरेज में उतारा  – प्रशासन अनभिज्ञ , आख़िर कब तक 

#DALIT LIVES MATTER 

STOP MANUAL SCAVENGING

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जयपुर | सीवरेज लाइन में दम तोड़ते वर्ग विशेष समुदाय के युवा कब तक मात्र कुछ पैसों के लियें यह अमानवीय कार्य करते रहेगें और अपशिष्ट पदार्थ व् सीवरेज में दम तोड़ते रहेंगे |

पांच दिन पहलें ही जयपुर सीतापुरा ज्वेलरी कम्पनी में एक वाल्मीकि समाज का अजय खोड़ा सीवरेज की ज़हरीली गैस से दम तोड़ चूका हैं   जबकि उसके दो अन्य साथी अस्पताल में अभी भी वेंटिलेटर पर जीवन के लियें संघर्ष कर रहें हैं आख़िर कब तक यह दलित समाज सामाजिक आर्थिक रूप पिछड़ता रहेगा और मल मूत्र में अपने आप को झोंकता रहेगा यह एक बड़ा सवाल हैं जो हमें स्वयं से पूछना चाहियें क्योंकि हम तो एक सभ्य समाज के जागरूक नागरिक हैं |

घटनाक्रम – मानसरोवर मध्यम मार्ग पर स्थित  यादव फ्लोर मिल के मालिक मूलचंद ने यादव फ्लोर मिल के सामने रोड पर स्थित सीवरेज  लाइन में 2 युवा व् एक बुजुर्ग को सीवरेज सफाई काम में बिना कोई सुरक्षा उपकरण के लगा रखा था जिसमे एक युवा सफाई कर्मी करण वाल्मीक सीवरेज लाइन में बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवरेज के अन्दर  उतर कर कार्य कर रहा था और उसका अन्य एक साथी उसका हाथ पकड़ रखा था जब पत्रकार व् सामाजिक कार्यकर्ता पवन देव ने उन्हें सीवरेज लाइन में बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के कार्य करते देखा तो सबसे पहले वीडियो  रिकार्डिंग चालू कर उन से बात की “आप यह क्या कर रहें इससे से सीवरेज में सफाई करते आप की जान भी जा सकती हैं तो सफाई कर्मी करण वाल्मीकि सीवरेज से बहार निकलकर बोलो की आटा चक्की वाला उन्हें लेकर आया हैं और अभी कार्य के कोई पैसा भी तय नहीं किया हैं ”  अर्थार्थ बिना मजदूरी तय करें ही सीवरेज लाइन में उतार दिया – यह  शोषण कब तक चलता रहेगा आख़िर |

कानूनी कार्यवाही – 

सामाजिक कार्यकर्त्ता व्  पत्रकार पवन देव ने इस घटना की जानकारी शिप्रा पथ पुलिस थाने में मय लिखित व् विडियो फुटेज ( FIR  ) के साथ दी हैं व् दोषी मूलचंद पर ” Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013 व्  SC / ST Act 1989 “ के तहत कार्यवाही के लियें उचित मांग की हैं

 

घटना का वीडियों देखें – लिंक पर क्लिक करें –

 

 

 

सामाजिक कार्यकर्त्ता पवन देव ने कहा – 

यह बड़े शर्म की बात हैं की आजादी के 70 वर्ष से अधिक होने के बाद भी यह वर्ग विशेष ( मेहतर ) समाज के लोग अपशिष्ट पदार्थो में मुहं देने को मजबूर हैं भारत सरकार ने ” सीवरेज लाइन व् मैला ठोने की प्रथा का अंत करने के लियें सख्त कानून बना रखा हैं जिसे Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013 व् दलित समाज के लोगों के शोषण व् अत्याचारों के निवारण के उदेश्य से SC /ST ACT 1989 बना रखा हैं जिससे दलित समाज के लोग स्वाभिमान से अपना जीवन जी सके लेकिन यह जो मानसरोवर मध्यम मार्ग स्थित यादव फ्लोर मिल के मालिक मूलचंद जी ने ” बिना मजदूरी तय करें वाल्मीकि समाज के युवा ओं को दबाब बनाकर सीवरेज लाइन के मैंन हाल में उतार दिया जो की कानूनी अपराध हैं मूलचंद जी ने जानबूझ कर “गैर इरातन हत्या का प्रयास किया हैं व् दलित समाज के युवा को बिना मजदूरी तय करें काम करवा रहें थे जो भी अपराध हैं क्योकि मूलचंद जी ने सोचा दलित समाज के लोग हैं इन का शोषण करना तो आम बात हैं लेकिन मेने पुलिस में इनके कृत्य की सूचना पुलिस में लिखित रूप में कर दी हैं इस स्वाभिमान की लड़ाई को में आगें लेकर जाउंगा |

 

 

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