राजस्थान सियासत – बाग़ी तो आयें सरकार बची – धागें में आई गांठ अब कैसे सुलझे , चलो सत्ता की कुर्सी के लियें लोकतंत्र का बहाना लें – 

 राजस्थान की सियासत में कांग्रेस पार्टी स्तर पर तो बाग़ी सचिन पायलट व् बागी विधायको की वापसी हो गई लेकिन जो 31 दिनों का शक्ति प्रदर्शन था जिसमे सचिन फेल हो गयें तो लोकतंत्र जनहित मुद्दें आदी का हवाला दे दिया और जनता को राजनेताओं ने एक बार फिर भावनात्मक रूप से लूट लिया
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लड़ाई के बाद भूलने-माफ करने, कसमें-वादों का दौर शुरू –  कुर्सी का खेल अभी भी नहीं हैं आसान 
गुजर गया सियासी तूफान, अब देश, प्रदेश, जनता और लोकतंत्र के हित में एक साथ काम करेंगे गहलोत-पायलट
जयपुर | राजस्थान में कांग्रेस आलाकमान के दखल से थमे सियासी घमासान के बाद अब दोनों खेमे (गहलोत पायलट) देश, प्रदेश और जनता के हित में मिल जुलकर काम करने की कसमें खा रहे हैं। मंगलवार को घर लौटे सचिन पायलट ने तो एक दिन बाद बुधवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीती ताहि बिसार दे पर अमल करने और आगे बढ़ने की बात कही। बाड़ेबंदी से निकले अपने समर्थक विधायकों से मुलाकात के दौरान बड़ा दिल दिखाते गहलोत ने कहा कि यह लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है लिहाजा उन्हें भूलो और माफ करो का रास्ता अपनाना होगा। हालांकि, बागियों की वापसी से उनका खेमा नाराज दिखा जिस पर सीएम ने समझाया कि कई बार सहन करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत , कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी , उपमुख्यमंत्री सचिन पायलेट ( फ़ाइल् चित्र )

आगे बढ़कर हाथ मिलाने में पायलट गुट भी पीछे नहीं रहा। पायलट के साथ मंत्री पद से बर्खास्त किए गए विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि यह (एक माह लंबा सियासी खींचतान भरा एपिसोड) एक टेस्ट मैच था जो कि ड्रॉ हो गया है और वे लोग पैवेलियन लौट आए हैं। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे लोग बागी नहीं हैं। उन लोगों ने पार्टी के खिलाफ कभी एक शब्द भी नहीं कहा। विश्वेंद्र सिंह ने बाद में यह भी स्पष्ट किया कि टेस्ट मैच ड्रॉ होने की बात कहना सिर्फ एक मजाक था लेकिन, दरअसल गहलोत को और मजबूत होकर उभरने का दम भरने वालों को दिया गया यह एक संकेत था कि इस सियासी घमासान में न कोई जीता, न कोई हारा यानी सत्ता हो या संगठन दोनों (गहलोत पायलट) बराबरी पर खड़े हैं। इससे पहले, गहलोत ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए
कहा कि इस लड़ाई में इतनी बड़ी संख्या में विधायकों ने उनका साथ दिया। हिंदुस्तान में शायद ही पहले कभी ऐसा हुआ होगा जब 100 से ज्यादा विधायक इतने लंबे समय के लिए एक साथ रुके होंगे यह लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है जो आगे भी जारी रहेगी। उनकी गुजारिश है कि सभी लोग मिलकर आगे बढ़ें। बात जारी रखते मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जनता ने बड़े भरोसे के साथ कांग्रेस की सरकार बनाई थी। अब उनकी जिम्मेदारी हमारी हैं की जनता को एक सूशासन दे |
सियासी लोगो का कहना हैं राह अभी आसन नहीं –
राजस्थान की सियासी लोगों का कहना हैं की अब कांग्रेस पार्टी के सभी विधायको में आपसी फुट पड़ चुकी हैं अब इनकी सभी विधायको की मज़बूरी हैं की सरकार चले ताकि इनका विधायक पद व् कुर्सी बची रहें इसलियें मज़बूरी में सभी विधायक बड़ी बड़ी बातें कर रहें है लेकिन आगामी समय में गुटबाजी तो तय हैं अब यह देखना हैं की इस गुटबाजी में क्या जनता का फायदा होगा यह देखना बाकी हैं |

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