क्या नई शिक्षानीति रोजगार दे पायेगी , अब स्कूलों में 10+2′ नहीं ‘5+3+3+4’ व्यवस्था – जानें अब स्टूडेंट्स का केसा होगा – भविष्य 

अब स्कूलों में 10+2′ नहीं ‘5+3+3+4’ व्यवस्था चलेगी
नई शिक्षा नीति को केंद्र की मंजूरी, 34 साल बाद पॉलिसी में हुआ बदलाव , मातृभाषा में पढ़ सकेंगे बच्चे
मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया जाएगा
नई शिक्षा नीति देश को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी: निशंक 
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नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने बुधवार को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस नई नीति पर मुहर लगा दी गई। इसके अलावा मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति देश को सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। इसके लिए व्यापक विचार-विमर्श किया गया है।
उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने नई शिक्षा नीति के बारे में जानकारी दी। इसके प्रमुख बिंदु शिक्षा के कई स्तरों पर क्रेडिट मिलेगी,
चार साल की पढ़ाई के बाद सीधा रिसर्च में जा सकेंगे, कई विधाओं में एकसाथ शिक्षा प्राप्त की जा सकेगी, कॉलेजों को ग्रेड के आधार पर वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता दी जाएगी। उच्च शिक्षा के लिए एक नियामक होगा। उसमें आगे कई व्यवस्था होगी। स्वयं जानकारी देने की पारदर्शी व्यवस्था होगी। डीम्ड, राज्य और केन्द्र सभी के विवि में एक ही मानक स्तर होंगे।
जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च होगा, 4.43 प्रतिशत वर्तमान में है। राष्ट्रीय रिसर्च फाउंडेशन के माध्यम से विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में फंडिंग होगी। देश की उच्च शिक्षा को उच्च स्तरीय बनाया जाएगा, ताकि विश्व के अन्य संस्थानों की बराबरी हो। तकनीक को शिक्षा में शामिल किया जाएगा। साथ ही सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई पीछे न छूटे।
कॉलेज में एडमिशन के लिए केवल एक एग्जाम
सभी कॉलेजों में एडमिशन के लिए एनटीए द्वारा केवल एक ही एग्जाम आयोजित कराया जाएगा। यह एग्जाम ऑप्शनल होगा जरूरी नहीं।
कक्षा 6 से कोडिंग, स्ट्रीम में कोई विभाजन नहीं मैथमेटिक्स थिंकिंग, साइंटिफिक टेंपर कोर्स का हिस्सा होंगे। खेल, व्यावसायिक, कला, वाणिज्य, विज्ञान जैसे सह- पाठ्यक्रम विषय समान स्तर पर होंगे। छात्र अपनी पसंद के अनुसार पाठ्यक्रम चुन सकते हैं। कक्षा 6 से छात्रों को कोडिंग की अनुमति दी जाएगी सार्वजनिक और निजी एचईआई के लिए, सामान्य मानदंड दिए जाएंगे। इसका मतलब यह है कि शुल्क नियामक ढांचे के भीतर तय किया जाएगा और कैप से ज्यादा कोई अतिरिक्त  शुल्क नहीं लिया जाएगा
नई शिक्षा नीति 2020 और 1986 की शिक्षा नीति में वैसे तो बहुत सारे अंतर हैं लेकिन सबसे बड़ा अंतर यह है कि अब स्कूलों में ’10+2′ के स्थान पर ‘5+3+3+4’ व्यवस्था चलेगी। इसी तरह और भी कई बड़े बदलाव नई शिक्षा नीति के माध्यम से किए गए हैं। 
1986 की शिक्षा नीति के तहत अब तक उच्च शिक्षा में कई नियामक कार्य कर रहे थे। इनमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, भारतीय वास्तुकला परिषद, भारतीय फार्मेसी परिषद, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद आदि अलग-अलग कार्य कर रही हैं। लेकिन अब नई शिक्षा नीति में विधि और चिकित्सा शिक्षा को छोड़कर बाकी पूरी उच्च शिक्षा को एक ही नियम के अंदर लाने का निर्णय किया गया है।
इसी तरह 1986 की शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा में स्नातक पाठ्यक्रम तीन साल का और स्नातकोत्तर दो साल का होता है। इसके अलावा एमफिल का भी पाठ्यक्रम किया जा सकता है। लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत स्नातक पाठ्यक्रमों को तीन या चार साल का कर दिया गया है। वहीं, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में एक या दो साल की पढ़ाई करनी होगी। वहीं, एमफिल को खत्म किया जाएगा। इसके अलावा अब उच्च शिक्षा में बहुस्तरीय प्रवेश एवं निकासी व्यवस्था लागू किया गया है। इसके तहत यदि विद्यार्थी चाहे तो वह एक सेमेस्टर, एक साल, दो साल या तीन साल बाद पढ़ाई छोड़ सकता है। विद्यार्थी को एक साल की पढ़ाई पर सर्टिफिकेट, दो साल की पढ़ाई पूरी करने पर डिप्लोमा और तीन या चार साल की पढ़ाई पूरी करने पर डिग्री दी जाएगी। इसके बाद विद्यार्थी कुछ सालों के अंतराल के बाद यदि अपनी पढ़ाई आगे जारी रखना चाहेगा तो उसे वहीं से प्रवेश मिल जाएगा जहां से उसने पढ़ाई छोड़ी थी।
1986 की शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा अंग्रेजी में ही करनी होती है लेकिन अब नई शिक्षा नीति में इसमें बदलाव किया गया है। अब हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं के अलावा आठ क्षेत्रीय भाषाओं में भी ई-कोर्स शुरू किए जा सकेंगे।
1986 की शिक्षा नीति के तहत बोर्ड परीक्षाओं का महत्त्व सबसे अधिक होता है लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत बोर्ड परीक्षा के भार को कम करने की पहल की गई है। इसके तहत बोर्ड परीक्षा को दो भागों में बांटा जा सकता है जो वस्तुनिष्ठ और विषय आधारित हो सकता है। विषयों को कठिन और सरल के रूप में बांटा जा सकेगा।
मुख्य बाते जो आपके लियें – जानना जरुरी हैं 
• कक्षा 6 से शुरू होगा वॉकेशनल प्रोग्राम, साथ में होगी इंटर्नशिप, लोकल क्राफ्ट स्टडी पर भी फोकस
• नई नीति के अध्याय 4 में बताया गया है कि कम से कम क्लास 5 तक की पढ़ाई का माध्यम घरेलू भाषा/मातृभाषा स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा होगा यानी क्लास 5 तक स्कूल में पढ़ाई का मौडिया स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा होगी।
•नई नीति में ये भी कहा गया है कि क्लास 5 के बाद क्लास 8 तक या उससे आगे भी रीजनल लैंग्वेज का यही फॉर्मूला लागू किया जाएगा।
•उच्च शिक्षा में अब मल्टीपल इंट्री और एग्जिट का विकल्प दिया जाएगा पांच साल के इंटीग्रेटेड कोर्स करने वालों को एमफिल नहीं करना होगा। अब कॉलेजों के एक्रेडिटेशन के आधार पर ऑटोनॉमी दी जाएगी। मेंटरिंग के लिए राष्ट्रीय मिशन चलाया जाएगा।
•हायर एजुकेशन के लिए एक ही रेग्यूलेटर रहेगा। अभी यूजीसी, एआईसीटीई शामिल हैं। हालांकि इसमें लीगल एवं मेडिकल एजुकेशन को शामिल नहीं किया जाएगा। उच्च शिक्षा में 2035 तक 50 फीसदी पहुंचने का लक्ष्य है। सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को लिए शिक्षा मानक समान रहेंगे। नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ) की स्थापना होगी जिससे रिसर्च और इन्नोवेशन को बढ़वा मिलेगा। तकनीकी के माध्यम से दिव्यांग जनों में शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा ई-कोर्सेस आठ क्षेत्रीय भाषा में विकसित किया जाएंगे। नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम (एनईटीएफ) की स्थापना की जाएगी।
•अर्ली चाइल्डहुड केयर एवं एजुकेशन के लिए कैरिकुलम एनसीईआरटी द्वारा तैयार होगा। इसमें 3 से 5 वर्ष के बच्चों के लिए विकसित किया जाएगा। बुनियाद शिक्षा (6 से 9 वर्ष के लिए) के लिए फाउंडेशनल लिट्रेसी एवं न्यूमेरेसी पर नेशनल मिशन शुरु किया जाएगा। पढ़ाई की रुपरेखा 5+3+3+4 के आधार पर तैयारी की जाएगी। इसमें अंतिम 4 वर्ष 9वीं से 12वीं शामिल हैं। नये कौशल (जैसे कोडिंग) का शुरु किया जाएगा।
• एक्सट्रा कैरिकुलर एक्टिविटीज को मेन कैरिकुलम में शामिल किया जाएगा। गिफ्टेड चिल्ड्रेन एवं गर्ल चाइल्ड के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। कक्षा 6 के बाद से ही वोकेशनल को जोड़ जाएगा। नई नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा जिसमें ईसीई, स्कूल, टीचर और एडल्ट एजुकेशन को जोड़ा जाएगा। बोर्ड एग्जाम को भाग में बांटा जाएगा।
•अगर छात्र रिसर्च में जाना चाहते है उनके लिए 4 साल का डिग्री प्रोग्राम होगा जबकि जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे लेकिन जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद पीएचडी कर सकते हैं, इसके लिए एमफिल की जरूरत नहीं होगी।
नई शिक्षा नीति में क्या बदलाव –  विशेषाताएं
• नई शिक्षा नीति में शिक्षा का अधिकार कानून के दायरे को व्यापक बनाया गया है। अब 3 साल से 18 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 के अंदर लाया जाएगा।
•अब कला, संगीत, शिल्प, खेल, योग, सामुदायिक सेवा जैसे सभी विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इन्हें सहायक पाठ्यक्रम के अतिरिक्त पाठ्यक्रम नहीं कहा जाएगा।
•नई शिक्षा नीति बच्चों में जीवन जीने के जरूरी कौशल और जरूरी क्षमताओं को विकसित किए जाने पर जोर देती है।
•नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शैक्षणिक संस्थानों में विश्वस्तरीय अनुसंधान और उच्च गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई पर जोर दिया गया है। अब हार एजुकेशन में वर्ल्ड क्लास रिसर्च पर फोकस किया जायेगा।
•अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम का ढांचा भी बदला जाएगा। अब कोर्स के दौरान कई कक्षा से निकलने या प्रवेश करने के कई विकल्प दिए जाएंगे।
• पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान पद्धतियों को शामिल करने, ‘राष्ट्रीय शिक्षा आयोग’ का गठन करने और प्राइवेट स्कूलों को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने से रोकने की सिफारिश की गई है। आयोग ने शिक्षकों के प्रशिक्षण शिक्षा कार्यक्रमों को मे व्यापक सुधार के लिए शिक्षक प्रशिक्षण और सभी विश्वविद्यालयों या कॉलेजों के स्तर पर शामिल करने की सिफारिश की है।
• राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 को भारतीय लोगों, की परम्पराओं,संस्कृतियों और भाषाओं की विविधता को ध्यान में रखते हुए तेजी से बदलते समाज की जरूरतों के आधार पर तैयार किया गया है।
•शिक्षा प्रणाली में बदलाव करते हुए उच्च गुणवत्ता और व्यापक शिक्षा तक सबकी पहुँच सुनिश्चित की गई है। इसके जरिए भारत का निरंतर विकास सुनिश्चित होगा साथ ही वैश्विक मंचों पर – आर्थिक विकास, सामाजिक विकास, समानता और पर्यावरण की देख – रेख, वैज्ञानिक उन्नति और सांस्कृतिक संरक्षण के नेतृत्व का समर्थन करेगा।
•इस नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को इसके दायरे में लाया गया है।

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