आज राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुट v / s सचिन पायलट गुट , हाई कोर्ट  v / s सुप्रीम कोर्ट , राज्यपाल v / s राष्टपति , मुख्यमंत्री v / s प्रधानमंत्री , कांग्रेस  v / s भाजपा अब आगे क्या –

राजस्थान सियासत – राज्यपाल से राष्टपति तक , आपसी रार बरक़रार , राज्यपाल ने फिर लौटाया सत्र बुलाने का प्रस्ताव
राजभवन से रार पहुंची दिल्ली दरबार, सीएम ने की पीएम से शिकायत राष्ट्रपति को भी भेजा ज्ञापन, राज्यपाल ने फिर लौटाया सत्र बुलाने का प्रस्ताव
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जयपुर | राजस्थान में कांग्रेस पार्टी से शुरू हुई  सियासत की जंग अब राज्यपाल से होती हुई राष्ट्रपति व् प्रधानमंत्री तक पहुँच गई हैं लेकिन अभी तक कोई समाधान होता नज़र नहीं आ रहा |
राजस्थान की राजनीति में इतने पेंच फंस चुके हैं की राजस्थान की राजनीति में आगें क्या होगा इसका जवाब अब – सियासत के महारथी भी नहीं दे पा रहें हैं |
राजभवन और राजस्थान सरकार के बीच जारी रार दिल्ली तक पहुंच गई है। राज्यपाल कलराज मिश्र की तरफ से  विधानसभा सत्र आहूत करने का प्रस्ताव यह कहकर लौटा दिया कि 21 दिन पहले यह नहीं बुलाया जा सकता। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सत्र नहीं बुलाया जाए ऐसी राजभवन की कोई मंशा नहीं है। राज्य सरकार ने 31 जुलाई से सत्र आहूत करने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है।
दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राजभवन के इस रवैये की शिकायत की है। कांग्रेस विधायक दल ने सत्र नहीं बुलाने की अनुमति देने की शिकायत का ज्ञापन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजा है। इधर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता सलमान खुर्शीद, अश्विनी कुमार और कपिल सिब्बल ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर विधानसभा का सत्र बुलाने का प्रस्ताव रखा।
विधानसभा अध्यक्ष  ने वापस ली एसएलपी ( slp )
विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के विधायकों के अयोग्यता नोटिस मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर पिटीशन सोमवार को वापस ले ली. वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि इस मामले में अभी सुनवाई की जरूरत नहीं गौरतलब हैं विधानसभा व् हाई कोर्ट में भी रार देखने को मिली थी जिसके बाद विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थी |
विशेष परिस्थिति में राज्यपाल मंत्रिमंडल की सलाह मानने को बाध्य नहीं: राजभवन
 राजभवन से जारी एक बयान में कहा है कि विधानसभा सत्र संवैधानिक प्रावधानों के अनुकूल आहूत होना आवश्यक है। मंत्रिमंडल के पुनः प्राप्त प्रस्ताव के संबंध में राज्यपाल ने विधिक राय ली। जिसमें नाम रबिया एवं मांग फेलिक्स बनाम विधानसभा उपाध्यक्ष अरुणाचल प्रदेश 2016 मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के पैरा 150 से 162 का अध्ययन किया गया है। जिससे यह तथ्य सामने आया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(1) की पालना के लिए भी मंत्रिमंडल की सलाह मान्य है । यदि परिस्थितियां विशेष हो ऐसी स्थिति में राज्यपाल यह सुनिश्चित करेंगे कि विधानसभा का मंत्र संविधान की भावना के अनुरूप आहूत किया जाए।
कांग्रेस विधायक दल का राष्ट्रपति को ज्ञापन
सियासी घमासान के बीच होटल फेयरमाउंट में सोमवार को एक सभा का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्यमंत्री प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा, पर्यवेक्षक रणदीप सुरजेवाला, अजय माकन समेत सभी विधायक मौजूद रहे। इस दौरान सभी ने रामधुनी सुनी। एआईसीसी के निर्देशानुसार लोकतंत्र बचाओ,संविधान बचाओ अभियान के तहत होटल में भी इस सभा का आयोजन किया गया। सभा में पांडे की ओर से एक ज्ञापन पढ़कर सुनाया गया।जिसे राष्ट्रपति भवन भेजा जाएगा।
सभी विधायकों ने ज्ञापन भेजने के लिए सहमति भी दी। ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले कुछ समय से लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई राज्य सरकारों को हॉर्स ट्रेडिंग और अन्य भ्रष्ट आचरण के माध्यम से अपदस्थ करने के भाजपा और इसके नेताओं के कुत्सित प्रयास न सिर्फ देश के लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं, बल्कि देश के संविधान की धज्जियां भी उड़ाई जा रही हैं। देश की जनता अवाक है। अनेक राज्यों के राज्यपाल अपने पद की गरिमा की चिंता किए बिना सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर संविधान की घोर अवहेलना कर रहे हैं। इन परिस्थितियों से राजस्थान जैसे शांतिप्रिय राज्य में पैसों के माध्यम से खरीद-फरोख्त के जो समाचार पुरे देश की जनता के सामने आए हैं वे स्तब्ध हैं। केन्द्रीय मंत्री के खरीद-फरोख्त और भ्रष्ट आचरण के प्रथम दृष्टि से प्रमाण पाये जाने के बावजूद भी उन्हें मंत्रिमंडल से नहीं हटाया जाना लोकतंत्र के माथे पर कलंक के समान है। राजनीतिक बदले की भावना से लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार और जनप्रतिनिधियों को कमजोर करने तथा डराने के लिए ईडी,इनकम टैक्स, सीबीआई का जो दुरूपयोग किया जा रहा है वह निन्दनीय है।
सरकार विश्वास प्रस्ताव लाना चाहती है इसका उल्लेख नहीं  – राज्यपाल 
 सरकार विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लाना चाहती है, लेकिन सत्र बुलाने के प्रस्ताव में इसका कोई उल्लेख नहीं है। यदि मत हासिल करना चाहती है तो यह अल्प अवधि में सत्र बुलाए जाने का युक्ति युक्त आधार बन सकता है। तीन बिन्दुओं पर फिर मांगा जवाब
विधानसभा का सत्र 21 दिन का स्लीपर नोटिस देकर बुलाया जाए। अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक एवं राजनीतिक प्रकरणों पर स्वस्थ बहस देश की शीर्ष संस्थाओं सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय आदि की भांति ऑनलाइन प्लेटफार्म पर किए जा सकते है। ताकि सामान्य जनता को कोविड 19 के संक्रमण से बचाया जा सके।
यदि किसी भी परिस्थिति में विश्वास मत हासिल करने की विधानसभा सत्र में में कार्यवाही की जाती है, तब ऐसी परिस्थितियों में जबकि अध्यक्ष की ओर से स्वयं सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुज्ञा याचिका दायर की है। विश्वास मत प्राप्त करने की सम्पूर्ण प्रक्रिया संसदीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव की उपस्थिति में की जाए और कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए तथा ऐसा विश्वास मत केवल हां या ना के बटन के माध्यम से ही किया जाए। साथ ही लाइव प्रसारण हो। -यह भी स्पष्ट किया जाए कि यदि विधानसभा का सत्र आहूत किया जाता है तो विधानसभा के सत्र के दौरान सामाजिक दूरी का पालन किस प्रकार किया जाएगा। आकस्मिकता के विधानसभा का सत्र आहूत कर 1000 से अधिक लोगों के जीवन को खतरे मे डाला जाए।

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