SC / ST समाजों के आर्थिक सशक्तिकरण के लियें सामाजिक संगठनो की संयुक्त संवाद सत्र का आयोजन –

For the economic empowerment of SC / ST societies, a joint dialogue session of the main

social organizations of Rajasthan –

जयपुर | राजस्थान में अनुसूचित जाति व जनजाति उपयोजनाओं पर कानून बनाने की आवश्यकता पर बजट अध्ययन एवं अनुसंधान केन्द्र (BARC),  सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान (SR Abhiyan),  दलित अधिकार केन्द्र (CDR),  अखिल भारतीय दलित महिला मंच (AIDMM), राजस्थान आदिवासी अधिकार मंच  (RAAM) एवं अम्बेडकर सोशल इक्विटी एंड एम्पॉवरमेंट मिशन द्वारा एक दिवसिय बैठक का आयोजन जयपुर में किया गया |

बजट अध्ययन एवं अनुसंधान केन्द्र के नेसार अहमद ने बताया कि केन्द्र एवं अन्य राज्य सरकारों की तरह राजस्थान सरकार द्वारा भी वित्त वर्ष 2017-18 से बजट के योजना व गैर योजना वर्गीकरण को समाप्त कर दिया गया है। इसके परिवणामस्वरुप राज्य में भी अनुसूचित जाति एवं जनजाति उपयोजनाओं का आधार समाप्त होने से ये उपयोजनाएं भी कमज़ोर हो गयी हैं। हालांकि राज्य सरकार ने योजना व गैर-योजना खर्च को समाप्त किये जाने के बावजूद 28 दिसम्बर 2016 को इस संबंध में एक परिपत्र जारी कर दोनों उपयोजनाओं में बजट आवंटन पूर्व की भांति यथावत् रखे जाने की बात कही थी।

दलित एक्टिविस्ट भँवर मेघवंशी ने कहा कि बजट में इस बदलाव के बाद देश के कईं राज्यों- तेलंगाना, उत्तराखंड आदि द्वारा उपयोजनाओं के क्रियांवयन हेतु कानून बनाकर प्रभावी रुप से लागू किये जा रहे हैं। इस स्थिति में यह आवश्यक  है कि राजस्थान सरकार द्वारा भी बजट में हुये बदलावों को ध्यान में रखते हुये तेलंगाना सरकार की तर्ज पर कानून बनाकर लागू किया जाये।

उपयोजनाओं के व्यवस्थित क्रियांवयन के संबंध में निम्नलिखित मांगे एवं सुझावों पर चर्चा की गई –

  • राज्य सरकार को केंद्र सरकार की तरह उपयोजनाओं के अंतर्गत किये जाने बजट आवंटन का दर्शाने हेतु अलग स्टेटमेंट (21 एवं 21 ए) जारी करने चाहिए।
  • उपयोजनाओं हेतु आयोजना,बजट आवंटन एवम खर्च ,निगरानी तथा पारदर्शिता हेतु राज्य,जिला एवं निम्न स्तर के सभी विभागों के साथ पंचायतीराज संस्थाओं को दिशा निर्देश जारी किए जाए
  • उपयोजनाओं के व्यवस्थित क्रियान्वयन हेतु पारदर्शिता एवम जवाबदेही की मजबूत व्यवस्था हो।
  • अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून ग्रामसभा को आयोजना का अधिकार देता है ,उपयोजनाओं से सम्बंधित आगामी कानून एवं रणनीति में पेसा के इस प्रावधान को शामिल किया जाना जरूरी है।
  • विधेयक में जनजाति कल्याण निधि (महाराष्ट्र पैटर्न) के संबंध में नियम भी शामिल किए जाए ।
  • कुछ दक्षिण भारतीय राज्यों की सरकारों द्वारा भूमिहीन दलितों एवम आदिवासियों को उपयोजनाओं के तहत भूमि उपलब्ध नही होते हुए भी भूमि खरीद कर वितरित की जा रही है जो कि सफल कार्यक्रम है । अतः राज्य सरकार भी ऐसे कार्यक्रम बना सकती है।

कार्यक्रम में असीम से डॉ राजेन्द्र जाटोलिया, डॉ बी एल बैरवा, अजाक के जी.एल वर्मा, सेंटर फॉर दलित राइट्स से सतीश वर्मा, एस. आर. अभियान से मुकेश निर्वासित, कमल कुमार, एडवोकेट ताराचंद वर्मा, डॉ नवीन नारायण, गोवर्धन जयपाल, गोपाल वर्मा उपस्थित थे ।

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