13 वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का शुभारंभ –

CM inaugurates Jaipur Literature Festival

Discussion on literature and seminars will inspire new generation – Chief Minister

जयपुर, 23 जनवरी। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने गुरूवार को 13वें जी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का दीप प्रज्जवलन कर शुभारंभ किया। शुभारंभ के बाद डिग्गी पैलेस के फ्रंट लॉन में मौजूद साहित्यकारों, साहित्य प्रेमियों एवं देश-विदेश से आए मेहमानों को सम्बोधित करते हुए श्री गहलोत ने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि 27 जनवरी तक चलने वाले इस समारोह में साहित्य, संस्कृति और विभिन्न विषयों पर होने वाली चर्चा और गोष्ठियों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिल सकेगी।
श्री गहलोत ने कहा कि जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने 12 साल का सफर पूरा किया है और इस दौरान इस फेस्टिवल ने देश ही नहीं दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि लेखक और साहित्यकार ही नहीं साहित्य प्रेमी और पाठक भी इस फेस्टिवल का इंतजार करते हैं और यहां आकर संवाद के माध्यम से साहित्य की बातें सुनते और साझा करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फेस्टिवल में नोबेल, मैन बुकर, पुलित्जर, मैग्सेसे और साहित्य अकादमी जैसे पुरस्कार प्राप्त प्रतिष्ठित लेखकों एवं साहित्यकारों के शामिल होने से इसका महत्व बढ़ गया है। जो पुस्तक प्रेमी अपने प्रिय साहित्यकारों को आज तक पढ़ते आए हैं, उन्हें वे यहां रूबरू देख और सुन सकते हैं।
 गहलोत ने कहा कि सौभाग्य की बात है कि हमारे प्रदेश के प्रतिष्ठित लेखक विजयदान देथा ‘‘बिज्जी’’ की प्रसिद्ध राजस्थानी कहानियों ‘‘बातां री फुलवारी’’ के अंग्रेजी अनुवाद ‘टाइमलेस टेल्स फ्रॉम मारवाड़‘ का फेस्टिवल के उद्घाटन समारोह में लोकार्पण करने का अवसर मुझे मिला। मैं इसके अनुवाद के लिए श्री विशेष कोठारी को बधाई देता हूं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘‘बातां री फुलवारी’’ राजस्थान के लोक जीवन, लोक संस्कृति, लोक कथाओं और यहां के जीवन मूल्यों को संजोए हुए है। इस पुस्तक में शामिल उनकी कहानियों का अंग्रेजी में अनुवाद होने से ये कहानियां अब देश-दुनिया के अन्य पाठकों तक पहुंचेंगी। उन्होंने कहा कि बिज्जी ने बोरून्दा जैसे एक छोटे से गांव में रहकर विश्व स्तर का साहित्य रचा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की जो हमारे लिए गौरव की बात है।
इससे पहले मुख्यमंत्री एवं अन्य अतिथियों ने ‘‘बातां री फुलवारी’’ के अंग्रेजी अनुवाद ‘टाइमलेस टेल्स फ्रॉम मारवाड़‘ का विमोचन किया। फेस्टिवल डायरेक्टर श्री संजोय रॉय ने उद्घाटन सत्र में आए अतिथियों का स्वागत किया और फेस्टिवल की रूपरेखा प्रस्तुत की। फेस्टिवल की को-डायरेक्टर नमिता गोखले ने कहा कि साहित्य के इस महाकुंभ के दौरान 15 भारतीय एवं 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के लेखक अपनी बात श्रोताओं के सामने रखेंगे। इसके अलावा इसमें मुंशी प्रेमचंद, विजयदान देथा सहित कई प्रतिष्ठित लेखकों एवं साहित्यकारों की रचनाओं पर सत्र होंगे।
लेखक विलियम डेलरिम्पल ने उद्घाटन सत्र में कहा कि जेएलएफ को इतने सालों में अभूतपूर्व ख्याति मिली है। इस फेस्टिवल में आने वाले साहित्य प्रेमियों को देखकर महसूस होता है कि भारत में साहित्य का अपना अलग महत्व है।
उद्घाटन समारोह में कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बीडी कल्ला, विधानसभा में मुख्य सचेतक श्री महेश जोशी, भारत में अमेरिका के राजदूत कैनेथ आई जस्टर, राजस्थान फाउण्डेशन के पूर्व उपाध्यक्ष श्री राजीव अरोड़ा, प्रमुख सचिव, कला एवं संस्कृति श्रीमती श्रेया गुहा एवं देश-विदेश से आए प्रतिष्ठित लेखक व साहित्यकार उपस्थित थे।

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