उत्तर भारत शीतलहर की चपेट में, 48 घंटों में 38 की मौत

नई दिल्ली। तीव्र शीतलहर से सम्पूर्ण उत्तर भारत प्रभावित है। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। उत्तर प्रदेश में बीते 48 घंटों में 38 लोगों के मौत की सूचना है। शीर्ष मौसम वैज्ञानिकों को आशंका है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की बेरुखी सामने आई है।

भूमध्य सागर में उत्पन्न होने वाले असमान्य और शक्तिशाली ‘पश्चिमी विक्षोभ’ ने हिंदी पट्टी सहित समूचे उत्तर भारत को बीते पखवाड़े से ठिठुरने को मजबूर किया है। यह स्थिति चार से पांच दशकों में एक बार पैदा होती है, जो लोगों को नए साल की पूर्व संध्या पर भी कंपकंपाएगी।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र जेनामणि ने कहा, ‘यह लंबी अवधि है, जिसकी प्रकृति अनोखी है और यह पूरे उत्तरपश्चिम भारत पर असर डालेगी।’ शीर्ष वैज्ञानिकों को आशंका है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की बेरुखी सामने आई है और अप्रत्याशित मौसम की यह स्थिति लोगों को परेशान करती रहेगी।

गंगा के मैदानी क्षेत्रों में घना कोहरा और हिंद महासागर की असामान्य वार्मिंग पश्चिमी विक्षोभ के लिए जिम्मेदार हैआने वाले सालों में उत्तर भारत मौसम के लोगों को मौसम की बेरुखी झेलनी पड़ सकती है। मौसम वैज्ञानिक आम तौर पर ज्यादा ठंड की अवधि 5 या 6 दिनों होती है। लेकिन इस साल 13 दिसंबर से तापमान में गिरावट जारी है

उष्णकटिबंधीय तूफान से भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरपश्चिम भाग में अचानक से ठंड के मौसम में बरसात हुई, जिससे देश के कुछ शहरों में दिन का तापमान 12 डिग्री से नीचे हो गया। हिमालयी क्षेत्र व गंगा के मैदानी क्षेत्र जिसमें पूरा उत्तर भारत शामिल है, मौसम को लेकर ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं और यहां के लोगों को मौसम की बेरुखी झेलनी पड़ सकती है।

गंगा के मैदानी इलाकों में स्मॉग (धुंध) का असर मौसम पर पड़ रहा है। उनके शोध से संकेत मिलता है कि पिछले कुछ वर्षों में तापमान में बदलाव का एक अप्रत्याशित पैटर्न चल रहा है। यह पैटर्न जारी रहेगा और निकट भविष्य में इसका मौसम पर ज्यादा गंभीर असर पड़ेगा। डॉ. सिंह ने कहा, ‘ध्यान देने की बात है कि अगर ज्यादा प्रदूषण होगा तो ज्यादा धुंध होगा।

दिल्ली में दिसंबर की सर्दी 1901 के बाद दूसरी बार सबसे सर्द
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिसंबर की सर्दी का यह आलम है कि यह 1901 के बाद दूसरी बार ऐसा हो सकता है जब साल का आखिरी महीना इतना सर्द रहा हो।

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