अप्रैल 2020 में शुरू होगी जनगणना, एनपीआर में होंगे 8 नए सवाल

नई दिल्ली। राष्‍ट्रीय जनसंख्‍या रजिस्‍टर (एनपीआर) को अपडेट करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की जनगणना-2021 की प्रक्रिया शुरू करने को मंजूरी दे दी है।एनपीआर अपडेशन में असम को छोड़कर देश की बाकी आबादी को शामिल किया जाएगा।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर  पहली बार 2010 में तैयार किया गया था। इसके दो प्रमुख उद्देश्य बताए गए थे। पहला- देश के सभी निवासियों के व्यक्तिगत ब्योरे का इकट्ठा करना. दूसरा- ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र के 15 साल और इससे ज्यादा उम्र के सभी निवासियों के फोटोग्राफ और अंगुलियों की छाप लेना. 2010 के इस राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को बनाने के लिए 15 बिंदुओं पर डेटा इकट्ठा किया गया था। नए रजिस्टर में आठ बिंदु और जोड़े गए हैं।

2010 में तैयार हुआ था पहला जनसंख्या रजिस्टर2010 के रजिस्टर में मांगी गई थी 15 जानकारीनए रजिस्टर में 8 नए बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) पहली बार 2010 में तैयार किया गया था। 2010 के इस राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को बनाने के लिए 15 बिंदुओं पर डेटा इकट्ठा किया गया था।

1- व्यक्ति का नाम
2- मुखिया से संबंध
3- पिता का नाम
4- माता का नाम
5- पत्नी/पति का नाम
6- लिंग
7- जन्मतिथि
8- वैवाहिक स्थिति
9- जन्म स्थान
10- घोषित राष्ट्रीयता
11- सामान्य निवास का वर्तमान पता
12- वर्तमान पते पर रहने की अवधि
13- स्थायी निवास का पता
14- व्यवसाय/कार्यकलाप
15- शैक्षणिक योग्यता

2020 में आने वाले NPR में आठ नए बिंदु जोड़े गए हैं। इस तरह नए NPR में कुल 21 बिंदुओं पर जानकारी मांगी जाएगी, जिनमें ये आठ नए बिंदु जोड़े गए हैं।

1- आधार नंबर (इच्छानुसार) 2- मोबाइल नंबर
3- माता-पिता का जन्मस्थान और जन्मतिथि
4- पिछला निवास पता (पहले कहां रहते थे)
5- पासपोर्ट नंबर (अगर भारतीय हैं तो)
6- वोटर आईडी कार्ड नंबर
7- पैन नंबर
8- ड्राइविंग लाइसेंस नंबर

गृह मंत्री अमित शाह ने यह आश्वस्त किया है कि एनपीआर और एनआरसी अलग-अलग है और एनपीआर से किसी की नागरिकता को कोई खतरा नहीं है, यह सिर्फ देश में रहने वाले लोगों का एक रजिस्टर है.।अमित शाह ने ये भी कहा है कि अगर किसी का नाम NPR में रह भी जाता है तो भी उसकी नागरिकता नहीं जाएगी।

जनसंख्या रजिस्टर अपडेट करने की प्रक्रिया जनसंख्‍या गणना का काम दो चरणों में किया जाएगा. पहले चरण के तहत अप्रैल-सितंबर 2020 तक प्रत्‍येक घर और उसमें रहने वाले व्‍यक्तियों की सूची बनाई जाएगी।

सरकार ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि एनपीआर और एनआरसी का आपस में कोई लेना-देना नहीं है और न ही इससे किसी की नागरिकता को कोई खतरा है।

विपक्षी दलों की तरफ से एनपीआर को एनआरसी की दिशा में पहला कदम बताया जा रहा है। नागरिकता संशोधन कानून  और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर  पर चल रहे घमासान के बीच एनपीआर की प्रक्रिया को मंजूरी ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

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