Citizenship Amendment Bill: पूर्वोत्तर में भारी विरोध, शरणार्थी मुसलमानों को नज़रअंदाज़ क्यों किया गया?

उर्दू की वरिष्ठ पत्रकार और लेखक शिरीन दलवी ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में महाराष्ट्र राज्य उर्दू साहित्य अकादमी की ओर से मिला सम्मान लौटा दिया है।

दिल्ली। नागरिकता संशोधन विधेयक में उन मुसलमानों को नागरिकता देने के दायरे से बाहर रखा गया है जो भारत में शरण लेना चाहते हैं। इस प्रकार भेदभावपूर्ण होने के कारण इसकी आलोचना की जा रही है और इसे भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को बदलने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है। अभी तक किसी को उनके धर्म के आधार पर भारतीय नागरिकता देने से मना नहीं किया गया है।

नार्थ ईस्ट के राज्यों में इस बिल का सख्त विरोध हो रहा है, वहां के लोगों का मानना है कि बांग्लादेश से ज़्यादातर हिंदू आकर असम, अरुणाचल, मणिपुर जैसे राज्यों में बसे हैं जिससे इन राज्यों का समाजी माहौल बिगड़ रहा है। ये अधिनियम देश को धर्म की बुनियाद पर बांटने का काम करेगा जो कि बराबरी के क़ानून के ख़िलाफ़ है।

बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को जो गै़रक़ानूनी तरीक़े से भारत में रहते हैं, भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।

बता दें कि देश के संविधान में धारा 14 के तहत धर्म या आस्था की बुनियाद पर दो धर्मों के बीच फ़र्क़ नहीं किया जा सकता, बिल पारित करने से पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए था। हालांकि इस विधेयक में मुसलमानों को शामिल नहीं किया गया है, जबकि इस मुल्क में रहते हुए नागरिकता हासिल करने का मुसलमानों का भी उतना ही हक़ है।

इस बिल की एक अहम बात ये है कि छह धर्मों के लोगों को देश से बाहर करने के अनुच्छेद को भी ख़त्म करने का प्रावधान है, मगर इसमें भी मुसलमानों को शामिल नहीं किया गया है। नागरिकता संशोधन विधेयक को जब से पेश किया गया है, देश के मुसलमानों में बेचैनी पाई जा रही थी और अब इस बेचैनी में इज़ाफ़ा होने के साथ-साथ लोग अपना विरोध भी दर्ज करवा रहे हैं।

ऐसी जानकारियां देश के मुसलमानों को बेचैन कर रही हैं, इस बिल के पास होने के बाद सभी मुस्लिम शरणार्थियों को गै़रक़ानूनी शरणार्थी घोषित किया जा सकता है। मौजूदा क़ानून के मुताबिक़ गै़रक़ानूनी तरीके से आए लोगों को उनके मुल्क वापिस भेज दिया जाएगा या हिरासत में लिया जा सकता है।

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