राजस्थान – दलित युवक की अवैध तरीके से हिरासत में रख पुलिस ने दिया – थर्ड डिग्री टॉर्चर युवक सदमें में –

जयपुर जिले के गोविंदगढ़ पुलिस ने दलित छात्र दीपक बलाई को अवैध तरीके से हिरासत में रख दिया थर्ड डिग्री टॉर्चर –

सामाजिक संगठन ने ली सुध – राजस्थान सरकार नींद में – आखिर क्यों

दीपक बलाई { पीड़ित }

ह्यूमन राईट्स लॉ नेटवर्क, ऑल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच व अधिकार सन्दर्भ केंद्र की संयुक्त फैक्ट फाइंडिंग टीम ने ग्राम सिंगोंद कला, पुलिस थाना गोविंदगढ़ का दौरा पीड़ित परिवार से मिला। पीड़ितों ने टीम को बताया कि दिनांक 13 फरवरी 2019 को पीड़ित दीपक बलाई अपने घर पर ही लेटा हुआ था, तभी 3 पुलिस वाले सादा वर्दी में गाड़ी लेकर आये और दीपक पर गांव के मंदिर से चांदी का छत्र व मूर्तियों को तोड़ने का आरोप लगाकर उसे उठाकर ले गए, रास्ते मे पुलिस ने दीपक से उसके छोटे भाई दशरथ को फोन करवाया और कहलवाया कि मेरा एक्सीडेंट हो गया है, पैर में फ्रेक्चर है, मुझे लेने आ जाना, इस सूचना पर दशरथ भी गोविंदगढ़ चला गया, वहाँ थाने के सामने खड़े पुलिस वालों ने उसे और उसके साथ गए 2 अन्य रिश्तेदारों को भी पकड़ लिया, परन्तु उन्हें तो शाम को ही छोड़ दिया इसके अलावा पुलिस वाले पीड़ित की माँ जमना देवी को भी पकड़ कर थाने लाये उसके साथ थाने में मौजूद महिला सिपाहियों ने मारपीट की और उसे वापिस घर छोड़ दिया, परन्तु दीपक और दशरथ को पूछताछ करके छोड़ देने के बहाने थाने पर ही बिठाए रखा।

थाने पर मौजूद पुलिसकर्मियों SHO मनीष शर्मा, SI भजनाराम, ASI विक्रम सिंह, कॉन्स्टेबल अनिल गोदारा, गोपाल व अन्य ने दिनांक 13 फरवरी से 16 फरवरी तक पीड़ित दीपक व उसके भाई दशरथ के साथ गम्भीर तरीके से हाथ पांव बांधकर डंडे व पटटे से मारपीट की, पुलिस ने पीड़ित दीपक को इतना बेरहमी से मारा कि उसके कूल्हे के दोनों तरह की चमड़ी और मांस उतर गया, तथा उसकी अंडरवियर चिपक गई। मारपीट के कारण दीपक की तबीयत बिगड़ी हुई है, वह चलने, फिरने बैठने उठने पूरी तरह असमर्थ है। जयपुर के SMS के डॉक्टरों ने सर्जरी करने के लिए कहा है।

फैक्ट फाइंडिंग टीम ने घटना के पीड़ितों व गवाहों से तथ्य जुटाए है, जिनसे यह प्रथम दृष्टया साबित होता है कि पुलिस ने पीड़ित परिवार की कमजोर स्थिति को देखते हुए, उन्हें जबरन चोरी के जुर्म में फ़साने के लिए यातनायें दी है, जो भारतीय सँविधान, पुलिस कानून, व अन्य कानूनों के तहत गम्भीर अपराध है। जिसके लिए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामला FIR दर्ज की जाए, उन्हें अविलम्ब बर्खास्त किया जाए।
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए फैक्ट फाइंडिंग टीम इस मामले को पुलिस व सरकार के उच्च अधिकारियों, मानवाधिकार आयोग व सक्षम न्याय में उठाएगी। फैक्ट फाइंडिंग टीम में एडवोकेट तारा चन्द वर्मा राज्य समन्वयक ह्यूमन राईट्स लॉ नेटवर्क, सुमन देवठिया राज्य समन्वयक ऑल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच व आगाज फाउंडेशन, कार्यकर्ता रघु वीर सिंह अधिकार सन्दर्भ केंद्र मौजूद थे।

स्टोरी –

( साभार  – तारा चन्द वर्मा )

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