डा. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय – जयपुर विधेयक, 2019 ध्वनिमत से पारित –

डा. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, 

जयपुर विधेयक, 2019 ध्वनिमत से पारित

जयपुर, 13 फरवरी। राज्य विधानसभा ने बुधवार को डा. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर विधेयक, 2019 ध्वनिमत से पारित कर दिया।
उच्च शिक्षा मंत्री श्री भंवर सिंह भाटी ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। विधेयक पर हुई बहस पर जबाव देते हुए उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और शिक्षा की गुणवत्ता को बनाये रखना सरकार की प्राथमिकता है। इसी को ध्यान मेें रखते हुए यह विधेयक लाया गया है।
श्री भाटी ने बताया कि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 5 करोड़ रूपये का शुरूआती प्रावधान किया गया है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के माध्यम से शोध कार्याेंं का संचालन, समान शैक्षणिक कैलेण्डर, विधि शिक्षा में एकरूपता, विधि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्यों की पूर्ति हो सकेगी। इस विश्वद्यिालय की स्थापना से विधिक चेतना के नये दौर की शुरूआत होगी तथा स्वरोजगार तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि शुरूआत में शैक्षणिक व अशैक्षणिक पदों को संविदा या पर््रतिनियुक्ति से भरा जाएगा।
उन्होंने बताया कि राज्य में 15 राजकीय तथा 66 निजी विधि महाविद्यालय है, जिनमें 30 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और इन सभी महाविद्यालयों को एक ही विश्वविद्यालय से संबद्धता मिले, ऎसे प्रयास किये जायेंगे।

 

उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य एजुकेशन हब के रूप में विकसित हो रहा है। वर्तमान में राज्य में उच्च शिक्षण संस्थाओं में 18 लाख नियमित एवं स्वयंपाठी विद्यार्थी नामांकित है। उन्होंने बताया कि राज्य का सकल नामांकन अनुपात 21.7 है जबकि राष्ट्रीय सकल नामांकन अनुपात 25.8 है। राज्य का सकल नामांकन अनुपात अभी भी राष्ट्रीय सकल नामांकन अनुपात से कम है। इसलिए उच्च शिक्षा में विस्तार की आवश्यकता है।
श्री भाटी ने बताया कि वर्ष 2012 में 7 राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालय खोले गये थे। यह देश में पहला उदाहरण था जब इतनी संख्या में वित्त पोषित विश्वविद्यालय एक साथ खोले गये। इनमें डा. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर भी शामिल था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार द्वारा कुलपति की नियुक्ति की गई, कुलसचिव के पद पर राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को पदस्थापित किया गया तथा अन्य स्टाफ संविदा व प्रतिनियुक्ति पर लगा दिये गये थे।
विश्वविद्यालय में 53 स्थाई पद सृजित किये गये थे और भूमि आवंटन प्रक्रियाधीन था। इस विश्वविद्यालय के लिए भवन निर्माण व अनावृति मद के प्रावधान किये गये थे, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार द्वारा इस विश्वविद्यालय को बंद कर दिया गया। इस विधेयक के माध्यम से विश्वविद्यालय को पुनःस्थापित किया जा रहा है।

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