जयपुर शहर लोकसभा चुनाव – यह दिग्गज लगे है लोबिंग में – भाजपा – कांग्रेस से

जयपुर शहर लोकसभा चुनाव
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कांग्रेस किस नेता पर लगाएगी दांव ?
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उम्मीदवार को लेकर कांग्रेसी खेमे में हो रहा है जबरदस्त चिन्तन मन्थन

 

जयपुर। दो महीने बाद होने जा रहे लोकसभा चुनाव को लेकर राजस्थान में दोनों बङी पार्टियों भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य दल भी पूरी तरह से सक्रिय हो चुके हैं। भाजपा को अपनी एकतरफा जीती हुई सभी सीटों पर दोबारा जीत मुश्किल लग रही है और वो सम्भावित नुकसान को कम से कम करना चाह रही है। वहीं कांग्रेस राज्य की सत्ता में आने के बाद केन्द्र की सत्ता में स्थापित होने के लिए आधी से ज्यादा सीट जीतना चाह रही है। लेकिन कांग्रेस के पास सबसे बङी दुविधा यह है कि उसके पास बहुत सी सीटों पर मजबूत उम्मीदवार ही नहीं हैं। लिहाजा वो ऐसी सीटों पर उम्मीदवार चयन को लेकर जबरदस्त पशोपेश में है और उसके लिए पार्टी के उच्च खेमे में बङी बारीकी से चिन्तन मन्थन शुरू हो गया है। इन सीटों की सूची में जयपुर शहर लोकसभा सीट भी शामिल है, जहाँ कांग्रेस नेतृत्व जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं है और वो कोई मजबूत उम्मीदवार तलाश करने में अपना माथा लगा रहा है।

जहाँ तक भाजपा का सवाल है तो जयपुर शहर लोकसभा सीट उसका अभेद्य दुर्ग माना जाता है और यहाँ से ज्यादातर चुनावों में भाजपा उम्मीदवार ही विजयी हुए हैं। वर्तमान में यहाँ से रामचरण बोहरा सांसद हैं और सियासी गलियारों में चर्चा है कि भाजपा उनका टिकट काटेगी तथा जयपुर राजघराने की राजकुमारी दीया कुमारी को मैदान में उतारेगी, जो 2013 के विधानसभा चुनाव में सवाई माधोपुर सीट से भाजपा की विधायक रही हैं तथा इस चुनाव में उनको टिकट नहीं दिया गया था। भाजपा के कुछ और नेताओं को भी दावेदार माना जा रहा है, जिनमें पूर्व मन्त्री अरूण चतुर्वेदी, मालवीय नगर विधायक कालीचरण सर्राफ और पूर्व विधायक एवं जिलाध्यक्ष मोहनलाल गुप्ता का नाम प्रमुख है। भाजपा यहाँ से अधिकतर ब्राह्मण समुदाय से सम्बंधित नेता को टिकट देती है, अगर इस बार भी उसने ब्राह्मण नेता को मैदान में उतारा, तो फिर कांग्रेस वैश्य समुदाय के नेता पर दांव लगा सकती है। अगर भाजपा दीया कुमारी को टिकट देती है, तो फिर कांग्रेस किसी ब्राह्मण नेता को मैदान में उतार सकती है। ऐसी चर्चाएं आजकल जयपुर के सियासी गलियारों में चल रही हैं।

कांग्रेस से करीब आधा दर्जन दावेदार हैं और कुछ चेहरे ऐसे हैं जो खुलेआम दावेदारी तो नहीं कर रहे हैं, लेकिन अगर किसी सियासी समीकरण से उन्हें टिकट मिल जाए, तो वो पूरी ताकत से चुनाव लङने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस टिकट के लिए जिन नेताओं की चर्चा सियासी खेमों में हो रही है, उनमें पीसीसी उपाध्यक्ष राजीव अरोङा, पूर्व सांसद अश्क अली टाक, पूर्व महापौर ज्योति खण्डेलवाल, प्रदेश मीडिया प्रभारी डाॅक्टर अर्चना शर्मा, संजय बाफना, सुरेश मिश्रा, जाकिर गुडएज आदि के नाम प्रमुख हैं। अर्चना शर्मा, जिन्हें एक सभ्य और शान्त स्वभाव की नेता माना जाता है तथा वे लम्बे समय से पीसीसी में विभिन्न पदों पर

कार्यरत रही हैं और वर्तमान में मीडिया इन्चार्ज हैं। वे कार्यकर्ताओं और आमजन में काफी लोकप्रिय हैं तथा उन्होंने इस बार भी शहर की मालवीय नगर विधानसभा सीट से चुनाव लङा और मामूली अन्तर से चुनाव हार गईं थीं। उनकी हार पर सभी को बङा मलाल हुआ, यहाँ तक कि उनके प्रतिद्वंदी खेमे को भी, ऐसा मतगणना के बाद हुई विभिन्न चर्चाओं में महसूस किया गया।

जहाँ तक बात राजीव अरोङा की है, तो वे इस बार आदर्श नगर सीट से मजबूत दावेदार थे तथा उनका टिकट एक तरह से पुख्ता माना जा रहा था। लेकिन एनवक्त पर उनका टिकट काट दिया गया और खबर है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें लोकसभा चुनाव लङवाने का आश्वासन दिया था। अगर पार्टी व्यापारिक घराने से सम्बंधित किसी परम्परागत कांग्रेसी नेता को मैदान में उतारती है, तो राजीव अरोङा एक मजबूत दावेदार हैं। उनकी सभी वर्गों में अच्छी पकङ है और उन्हें एक सुलझा हुआ शरीफ राजनेता कहा जाता है। वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नजदीकी और खासमखास समझे जाते हैं। अगर बात ज्योति खण्डेलवाल की करें, तो वे जयपुर की महापौर रह चुकी हैं और महापौर के चुनाव में वे डायरेक्टर विजयी हुईं थीं। उन्होंने किशनपोल विधानसभा सीट से टिकट भी मांगा था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। जिस पर उन्होंने नाराजगी का भी इजहार किया, लेकिन पार्टी नेतृत्व से चर्चा के बाद उन्होंने किसी भी प्रकार की नाराजगी से इन्कार किया। खबर है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें भी लोकसभा चुनाव लङवाने का आश्वासन दिया था। ज्योति खण्डेलवाल वैश्य समुदाय से स

म्बंधित कांग्रेस की एक मजबूत नेता हैं, लेकिन स्थानीय कुछ कांग्रेसी नेताओं से उनका छत्तीस का आंकड़ा भी जग जाहिर है। फिर भी सिया

सी हल्कों में चर्चा है कि अगर कांग्रेस नेतृत्व किसी महिला और वैश्य समुदाय के नेता के तौर पर उम्मीदवारी तय करेगा, तो ज्योति को नजरअंदाज करना उसके लिए आसान नहीं होगा।

अगर कांग्रेस हर बार की तरह इस बार भी एक लोकसभा प्रत्याशी मुस्लिम नेता को बनाएगी, तो उसके पास टोंक, चूरू, झुन्झुनूं और जयपुर शहर के अलावा कोई सीट नहीं है। इस समीकरण में अगर कांग्रेस जयपुर शहर को मुस्लिम कोटे की सीट बनाती है, तो फिर पार्टी के पास दो ही नेता हैं एक पूर्व सांसद अश्क अली टाक और दूसरे जाकिर गुडएज। अश्क अली टाक ने फतेहपुर से

विधानसभा का टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नजदीकी माने जाते हैं, लेकिन उनके सामने दुविधा यह है कि वे जयपुर में कभी सक्रिय नहीं रहे, जबकि 2008 में पार्टी ने उन्हें किशनपोल विधानसभा सीट से टिकट दिया था। फिर भी चुनाव हारने के बाद वे जयपुर को भूल गए। वे वर्तमान में सांसद कोटे से वक्फ बोर्ड के मेम्बर हैं। जहाँ तक जाकिर गुडएज की बात है, तो वे भी यहाँ की आदर्श नगर सीट से टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। वे पिछले तीन चुनावों से विधानसभा का टिकट मांग रहे हैं। वे कांग्रेस की विचारधारा वाले परम्परागत कांग्रेसी घराने से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता सईद खान गुडएज को कांग्रेस ने एक बार जयपुर शहर लोकसभा सीट से और एक बार यहाँ की जौहरी बाज़ार विधानसभा सीट से टिकट दिया था। सईद खान गुडएज को कांग्रेस का कद्दावर नेता माना जाता था। जाकिर गुडएज एक अच्छे बिजनेस मैन हैं और वे एक सभ्य व मिलनसार छवि के धनी हैं।

भाजपा -कांग्रेस की राह नहीं होगी आसा –

सूत्रों के अनुसार जयपुर शहर लोकसभा सीट से इस बार दलित – मुस्लीम समाज भी सयुक्त रूप से अपना प्रत्याशी मैदान में उतार सकती है क्योकि दलित समाज आरक्षण , रोस्टर व् मुस्लीम समाज तीन तलाक व् मोब्लिंचिग जैसे मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस की कार्यशेली से नाराज चल रहे है |

 

लेख़क – एम फारूक़ ख़ान  { सम्पादक इकरा पत्रिका }

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