ग्रामीणों ने निर्वाचन आयोग को दिखाया आईना – उठे सवाल

ग्रामीणों ने निर्वाचन आयोग को दिखाया आईना आयोग के दावे पर उठने लगे सवाल –

भोपाल। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी बीएल कांताराव 28 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव को लेकर दिन भर प्रेस ब्रीफिंग के जरिये भले ही मतदान बहिष्कार की सूचनाओं का खंडन करते हुए शेखी बघारते रहे हो …लेकिन शनिवार को निर्वाचन आयोग को उस समय बड़ा झटका लगा तब इछावर विधानसभा क्षेत्र के गऊखेड़ी गांव के सात सौ मतदाताओं ने मतदान बहिष्कार की जानकारी दी। चुनाव के दौरान यह शायद पहला मौका होगा जब ग्रामीणों ने विकास न होने की बात को लेकर मतदान का सार्वजनिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया होगा .. गऊखेड़ी गांव के निवासी दौलत राम ने बताया कि सत्तर साल में भले ही प्रदेश में विकास हुआ हो और विकास के नाम पर करोड़ो

रूपये का विज्ञापन बांटा गया हो …लेकिन गऊखेड़ी गांव में विकास आते आते बूढ़ा हो जाता है …यह गांव कहीं और नहीं बल्कि शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में स्थित है …लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कभी भी इस गांव में आज तक झांकने भी नहीं गए…गांव में न तो सड़क है न ही सिचाई के साधन और न ही ढंग का कोई स्कूल…अगर गांव में कुछ है तो भूख है लाचारी है बेरोजगारी और बीमारी है …गांव के निवासी जीवन सिंह पटेल ने बताया कि हम लोगों के पास अगर कुछ जमा पूंजी के नाम पर है तो केवल स्मृतियां है …वह भी स्मृतियां ऐसी जिन्हें हम तस्वीरों में यात्राओं के दौरान देखे है …सिचाई के अभाव में गांव की 12 सौ एकड़ जमीन बंजर है ….जब कोई चुनाव आता है तब कुछ लोग सफेद कपड़ा पहनकर बघ्घी में सवार होकर वोट मांगने के लिए जरूर आते है …इन लोगों को देखकर लगता है कि यह धरती से नहीं बल्कि आसमान से टपके हुए कोई फरिस्ते हो…गांव के बच्चे आठवी के बाद पढ़ नहीं पाते …कारण की आठवीं के बाद गांव में कोई स्कूल नहीं …बच्चो की पढ़ने की बहुत ही तमन्ना है …लेकिन हम लोगों का दुर्भाग्य कहिये की हम लोग अपने बच्चों के सपनो के हत्यारे है …. क्या करे अखबारों में शिवराज जी विकास का रथ लेकर ऐसे दौड़ते है जैसे सूरज का कोई सातवां घोड़ा उनके पास हो …पिछले पंद्रह साल से हम लोग के कान भी घोड़ो के टॉप की आवाज सुनने के लिए तरस रहे है …लेकिन वह विकास नहीं आया .. अमरीका वाली सड़क भी नहीं आई ….
ग्रामीणों के गुस्से को देखकर यही एहसास हुआ कि आज सही मायने में कोई जागरूक हुआ हो …ग्रामीणों के साहस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों ने कलेक्टर को सूचित करके मतदान का बहिष्कार किया … ग्रामीणों के इस एलान के बाद जिला पंचायत अधिकारी गांव पहुंचते है और गांव वालों को धमकाते है कि अगर मतदान का बहिष्कार करोगे तो राशन कार्ड बन्द कर दिया जाएगा …अधिकारी को उसी अंदाज में ग्रामीणों ने जवाब देकर बेरंग लौटा दिया कि सांसे तो नहीं बन्द करोगे …ग्रामीणों ने कांताराव को बताया कि जब तक हमारे गांव में विकास का घोड़ा नहीं दौड़ेगा तब तक हम मतदान का बहिष्कार करते रहेंगे ….
आज सही मायने में किसी ने अपना कलेजा निकालकर धरती पर रखने का साहस दिखाया होगा।।

story by – nitish mirsh

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