जयपुर शहर की सीटों को लेकर गहलोत – सचिन आमने -सामने

जयपुर शहर की सीटों को लेकर कांग्रेस में मचा घमासान – कौन मारेगा बाजी –

जयपुर। विधानसभा चुनाव में टिकटों को लेकर सभी दावेदारों ने अपना हर सम्भव प्रयास तेज कर दिया है। दावेदारों का नब्ज  हर पल  ऊपर नीचे हो रहा है। कभी किसी की टिकट फाइनल होने की खबर आ रही है, तो कभी किसी की टिकट कटने की खबर आ रही है। इस बीच कांग्रेस में टिकटों को लेकर घमासान तेज हो गया है। खबर है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी, पूर्व केन्द्रीय मन्त्री भंवर जितेन्द्र सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सी पी जोशी आदि में टिकटों को लेकर खींचतान बढती जा रही है। अन्य क्षेत्रों की तरह जयपुर शहर की सीटों को लेकर भी तनाव अपने ऊरूज पर पहुंच गया है।

शहर की आठों सीटों पर किसी की टिकट कटने और किसी को मिलने की खबरों से खींचतान और तेज हो गई है। गहलोत और पायलट गुट राजधानी की सीटों को लेकर आमने-सामने हो गए हैं। राजधानी की सीटों पर गहलोत व पायलट अपना दबदबा मजबूत करने के लिए हर सियासी हरबा इस्तेमाल कर रहे हैं। खबर है कि गहलोत हर हाल में आठ की आठ सीट अपने चहेतों को दिलवाना चाह रहे हैं। जिसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि जब सभी सांसदों व पूर्व सांसदों के क्षेत्र में उनकी राय को प्राथमिकता दी जा रही है, तो फिर जयपुर शहर की सीटों पर यहाँ के पूर्व सांसद महेश जोशी की राय को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही है ? महेश जोशी को गहलोत का खासमखास समझा जाता है। इसलिए गहलोत महेश जोशी के बहाने जयपुर की आठों सीटों को अपनी मर्जी के मुताबिक आवंटित करना चाह रहे हैं। जबकि पायलट गुट राजधानी की सीटों पर महेश जोशी को नजरअंदाज कर अपनी मर्जी चलाना चाह रहा है। खबर है कि पायलट गुट के इस रवैये से गहलोत सख्त नाराज हैं, लेकिन वे अभी खामोश हैं और उन्होंने राजधानी की सीटों में अधिक से अधिक हासिल करने के पत्ते चलने शुरू कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार जयपुर शहर की सीटों पर सबसे ज्यादा तीन मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व चिन्तन मन्थन कर रहा है। जिसमें पहला स्थानीय दावेदार को टिकट दी जाए। दूसरा बगावत कैसी होगी और उसे कैसे रोका जाएगा, इस मुद्दे पर गहलोत के बारे में चर्चा है कि वो बगावत नहीं होने देंगे। अगर बगावत हुई भी तो वो बगावत को शान्त कर देंगे। तीसरा मुद्दा 2014 के लोकसभा चुनाव में महेश जोशी की हार का है। जिसके बारे में शिकायत पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी तक पहुंच गई है कि महेश जोशी की करारी हार कांग्रेस के विधानसभा प्रत्याशियों की देन है। जिन्होंने भाजपा से हाथ मिलाकर पार्टी के घोषित लोकसभा प्रत्याशी को पांच लाख से अधिक के अन्तर से हरवाया था। पहले और तीसरे मुद्दे को लेकर घमासान और तेज होने की भी चर्चा है। अगर स्थानीय को प्राथमिकता दी जाएगी, तो फिर अश्क अली टाक, दुर्रू मियां, अर्चना शर्मा, अमीन कागजी, रफीक खान आदि दावेदारों के लिए टिकट हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। अगर पायलट ने अङाअङी करके महेश जोशी को टिकट नहीं लेने दी, तो फिर लोकसभा चुनाव में उनको भाजपा से सांठगांठ कर बङे अन्तर से हरवाने का मामला तुल पकङेगा |

story by  – एम फारूक़ ख़ान  { सम्पादक इकरा पत्रिका }

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