CBI – बुलेट प्रूफ जैकेट डील [639 करोड़ ] और राफेल का क्या है इंटरनल कनेक्शन – जाने यहाँ ख़ास

ख़ास रिपोर्ट – लाल फीताशाही का मायाजाल 

सीबीआई – भाजपा फण्ड ,राफेल और बुलेट प्रूफ जैकेट डील के त्रिकोणीय पेंच में फसी – भाजपा 

सीबीआई कार्यवाहक निदेशक नागेश्वर राव का दागी इतिहास & जूनियर अधिकारी होने के बावजूद उनको नियुक्त किया जाना मोदी सरकार पर स्वालिया निशान – आखिर क्यों 
यदि आलोक वर्मा को न हटाया जाता तो राफेल घोटाले के साथ साथ एक और घोटाले बुलेट प्रूफ जैकेट 639 करोड़ का खुलासा सीबीआई जाँच में निकल आता और इस आग की तपिश फिर से कई नए नामों को झुलगा देती -जिसके लिए भाजपा तैयार नहीं 

नागेश्वर राव का दागी इतिहास –
सीबीआई कार्यवाहक निदेशक नागेश्वर राव का दागी इतिहास और जूनियर अधिकारी होने के बावजूद उनको नियुक्त किया जाना मोदी सरकार की खोटी नियत और भ्रष्टों का साथ साबित करता है 
image.pngयह नागेश्वर राव का एनुअल प्रॉपर्टी रिटर्न है जो गृह मंत्रालय में जमा किया गया था , इसके अनुसार एक प्रॉपर्टी आंध्र प्रदेश में नागेश्वर राव की पत्नी के नाम से होना बताया गया है ,जो उनकी पत्नी और साले के जॉइंट नाम पर है ,इसके लिए 25 लाख रूपये एक कंपनी  एंजेला मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड से ऋण लेना बताया गया है।
image.png
इस कंपनी का ऑफिस साल्ट लेक एरिया कोलकाता में दिखाया जाता है ,और इसके मालिकान प्रतीक अग्रवाल वगैरह  मूल रूप से मध्यप्रदेश के निवासी है ,इस कम्पनी के शेयर होल्डर्स काफी नामचीन रूंगटा ग्रुप्स भी है तो दूसरी तरफ नागेश्वर राव की पत्नी भी इस कंपनी में शेयर होल्डर है जिनका करीब 60 लाख का निवेश है यहां और वो यहां से उक्त प्रॉपर्टी खरीद करने के लिए 25 लाख का ऋण लेती है , शेयर होल्डर लिस्ट में आप देख सकते है हरेक शेयरहोल्डर ने अपना पता अलग लिखा है लेकिन नागेश्वर राव की पत्नी मन्नाम संध्या जिनका नाम लिस्ट में सबसे नीचे है वो वही पता लिखवाती है जो इस कंपनी का पता है और यहां वो अपने पति नागेश्वर राव की जगह अपने पिता का नाम लिखती है , हकीकत में साल्ट लेक कॉलोनी का वो पता मात्र 200 स्क्वायर फ़ीट का एक छोटा सा ऑफिस है और उस पते पर अन्य कंपनियां भी संचालित हो रही है।
उपरोक्त मसला सीधे सीधे मनी लॉन्डरिंग और रिश्वत के पैसे यहां खपाने और ऋण के नाम पर वापस लेने का खेल है।  इस कंपनी के मालिकों का मूल निवास मध्यप्रदेश है और इनका काम कोलकाता से हवाला और मनी लॉन्डरिंग शैल कंपनियों के जरिये करना रहा है ,यही इन कम्पनियो के रिकॉर्ड के अध्ययन से साबित होता है।
image.pngयह एक छोटा सा मामूली उदाहरण मात्र है किस तरह उक्त मामले की जानकारी सीबीआई और सीवीसी को होने के बावजूद मोदी सरकार नागेश्वर राव को कार्यवाहक निदेशक नियुक्त करती है ,जिसका मतलब यही है कि उनको अपना रबड़ स्टाम्प टाइप अधिकारी सीबीआई में निदेशक बनाना रहा था ताकि राफेल घोटाले की जांच न हो पाए।
   यदि आलोक वर्मा को न हटाया जाता तो राफेल घोटाले के साथ साथ एक और घोटाले बुलेट प्रूफ जैकेट 639 करोड़ का खुलासा सीबीआई जाँच में निकल आता और इस आग की तपिश फिर से कई नए नामों को झुलसा देती –
क्या है यह पूरा घोटाला कुछ इस तरह से कड़ी से कड़ी समझ सकते है –
 मध्यप्रदेश के पूर्व डीजीपी सुरेंद्र सिंह जी पर , जो इन दिनों भाजपा सरकार से अपने रसूख का फायदा उठाते हुए रक्षा मंत्रालय अंतर्गत मिश्र धातु निगम लिमिटेड में इंडिपेंडेंट निदेशक के तौर पर नियुक्त है , यह पीएसयू आर्म्ड फोर्सेज के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट्स और वाहन बनाता आया है।
image.png
उदाहरण के लिए आप इस मिनी रत्न दर्जा प्राप्त पीएसयू मिश्र धातु निगम लिमिटेड के वर्ष 2017 -18 की वार्षिक रिपोर्ट के एक अंश का हिस्सा पढ़िए ,जहाँ चेयरमैन साहब बताते है कंपनी प्रॉफिट में है ,वर्ष 2016-17 में काफी बेहतर परफॉर्म किया था ,इस वर्ष सेल ग्रोथ और ज्यादा हो सकती थी लेकिन कम हुई क्यूंकि कुछ क्रिटिकल इक्विपमेंट नहीं थे और मोदी सरकार ने जिस तरह राफेल डील में रिलायंस कम्पनी को तरजीह देते हुए हिंदुस्तान एरनॉटिक्स लिमिटेड को साइड कर दिया था ठीक उसी तरह यहाँ भी इस मिनी रत्न पीएसयू को गर्त में धकेलने की तैयारी जारी है ,इसके हाथो से 639 करोड़ का बुलेट प्रूफ जैकेट डील छीन कर एक गुमनाम सी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दे दिया है।
image.png  पूर्व डीजीपी मध्यप्रदेश सुरेंद्र सिंह जी समेत मिश्र धातु निगम लिमिटेड के समस्त निदेशक केंद्र की मोदी सरकार के समक्ष असहाय हो गए होंगे तभी वो लोग कुछ कह नहीं पाए और एक लाख छियासी हजार बुलेट प्रूफ जैकेट की डील 639 करोड़ वाली एक गुमनाम कंपनी को 9 अप्रैल 2018 को दे दी जाती है।  
image.png मेसर्स एस एम पल्प पैकेजिंग प्राइवेट लिमिटेड को रक्षा विभाग से लाइसेंस मिला था सन 2008 में बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने के लिए ,यह रिपोर्ट का स्क्रीन शॉट फरवरी 2018 तक डीआईपीपी से जारी लाइसेंस सुदा कंपनियों के डेटा से लिया गया है ,यहां आप इस कम्पनी की क्षमता 25000 जैकेट प्रति वर्ष बनाने की देखेंगे और कम्पनी का पता संगरूर पंजाब का है।
जब इस कम्पनी को आप रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज पर चैक करेंगे तो इस कम्पनी का नाम अब बदल कर अब एसएमपीपी प्राइवेट लिमिटेड हो चुका है ,हालाँकि नाम परिवर्तन की सुचना  डीआईपीपी लाइसेंस पर दर्ज नहीं है जबकि नाम परिवर्तन 2016 में हो चुका है और डीआईपीपी की यह लिस्ट फरवरी 2018 की है।   रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के अनुसार कम्पनी की कुल जमा शेयर कैपिटल बीस लाख रूपये है और मार्च 2017 तक की बैलेंसशीट दी गई है।  मात्र बीस लाख की कैपिटल होने के बावजूद कंपनी को 639 करोड़ का ठेका दिया गया है , कंपनी पर करीब 45 करोड़ का बैंक ऋण भी है।
जब इस कंपनी को आप गूगल करते हुए इसकी वेबसाइट पर जायेंगे तब http://smgroupindia.com/  आप वहां देख सकते है इन्होने एक लाख छियासी हजार बुलेट प्रूफ जैकेट 639 करोड़ की डील को प्रमुखता से जगह दी है , वेबसाइट के कांटेक्ट पेज पर जो एड्रेस दिया गया है वो डीआईपीपी के लाइसेंस पर दर्ज अड्रेस और रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज में दिए हुए अड्रेस से एक दम अलग संगरूर की जगह दिल्ली में बताया गया है।
मैंने इस कंपनी के सभी अड्रेस पर जा कर देखा –चाहे वो संगरूर हो या दिल्ली ,मुझे वहां ऐसा कुछ भारी भरकम तामझाम नहीं देखने को मिला जैसा वेबसाइट पर दिखाया गया है।  यदि आप कंपनी के इस लिंक को पढ़े तब पता चलेगा कि ये बुलेट प्रूफ जैकेट की डिलीवरी 2022 तक दे पाएंगे अगले 3 सालों में
लेकिन 3 साल या 2022 तक भी एक लाख छियासी हजार जैकेट की डिलीवरी हो जाये उसमे संशय ही है क्यूंकि लाइसेंस के मुताबिक कम्पनी की क्षमता 25000 जैकेट की है ,इस हिसाब से 7 साल का वक़्त लगना चाहिए।
जब आप वेबसाइट पर मौजूद सोशल मीडिया लिंक्स पर जायेंगे तब पता चलेगा कि कंपनी के फेसबुक टवीटर लिंक्डइन सब प्रोफाइल टेंडर मिलने से ठीक पहले मार्च 2018 में बनाये गए है ,कम्पनी के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉक्टर एस सी कंसल और इनके पुत्र आशीष कंसल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर दोनों को आप किसी भी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर नहीं खोज पाएंगे ,इनका कोई पेज फेसबुक टवीटर लिंक्डइन पर नहीं है और यह काफी अजीब लगता है आज के इस दौर में जब हर दूसरा आदमी सोशल मीडिया का आदी बन चुका है।
पूरे प्रकरण से साफ़ है कि सिर्फ दलाली खाने के लिए ही इस गुमनाम फर्म को 639 करोड़ का ठेका दिया गया था ,और इस दलाली के लालच ने ही बुलेट प्रूफ जैकेट की डील सरकारी कंपनी मिश्र धातु निगम लिमिटेड से छीन कर यहां पहुंचाई। ठीक उसी तरह जैसे हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड से डील छीन कर रिलायंस को दी गई। 
मिश्र धातु निगम लिमिटेड के इंडिपेंडेंट निदेशक पूर्व डीजीपी सुरेंद्र सिंह समेत पूरा मैनेजमेंट इस धांधली पर रहसयमई चुप्पी पर है ,,जबकि पूर्व डीजीपी सुरेंद्र सिंह से एक आईपीएस होने के नाते उम्मीद की जा सकती है कि वो बुलेट प्रूफ जैकेट की अहमियत एक सिपाही के लिए क्या होगी ज्यादा बेहतर समझते होंगे ,,लेकिन इंडिपेंडेंट निदेशक का पद और आगामी भविष्य में कोई और पद मिलने का लोभ शायद उन्हें चुप रहने पर मजबूर करता हुआ होगा।
 बात -बात पर सेना का सम्मान गौरव और राष्ट्रवाद का नगाड़ा बजाने वाली राष्ट्रवादी सरकार कैसे सैनिको के लिए अहम बुलेट प्रूफ जैकेट की डील पर  इतनी थेथर है कि गुमनाम कम्पनी से दलाली मिल जाए सिर्फ इसलिए सरकारी कम्पनी को डुबो रही है और सैनिको के जीवन के साथ खिलवाड़ भी कर रही है।

एक लाख छियासी हजार बुलेट प्रूफ जैकेट डील [639 करोड़ ] और राफेल का क्या है इंटरनल कनेक्शन का सच  –

बतौर खोजी पत्रकार मैंने ही राफेल जहाज घोटाले से संबंधित रिसर्च व स्पेशल स्टोरी की थी , घोटाले से जुड़ा  एक दस्तावेज जो मिनिस्ट्री ऑफ़ डिफेंस का है ,उसे अहम सबूत के साथ मेरे द्वारा कांग्रेस पार्टी को दिया गया और कांग्रेस  ने वो दस्तावेज  सीबीआई और सीवीसी को अपने ज्ञापन में सौंपा था , यदि उसकी जाँच होती तो राफेल के साथ साथ घोटाले की आंच आगे बढ़ कर इस बुलेट प्रूफ जैकेट डील पर भी आ जाती।  अतः तुरंत आधी रात को आलोक वर्मा को हटा कर छुट्टी पर भेज दिया गया और उनका दफ्तर सील कर दिया गया , ताकि ये सब दस्तावेज जांच के घेरे में न आ पाए।
आप इस संलग्न फाइल पीडीफ को देखिये जो रक्षा मंत्रालय द्वारा 4 जुलाई 2017 को तैयार किया गया है और सरकार के 3 सालो का रिपोर्ट कार्ड बताता है 2014 -2017 तक।  यहां रक्षा मंत्रालय ने 31 मई 2017 तक की अपडेटेड निजी  कम्पनियो की सूचि जारी की है जिनका जॉइंट वेंचर रक्षा मंत्रालय द्वारा सर्टिफाइड है और साथ ही एक सूचि और है जो रक्षा मंत्रालय द्वारा निजी कम्पनियो की है जिनको लाइसेंस दिया गया था — आप इस लिस्ट को गौर से देखिये अनिल अम्बानी वाली रिलायंस का नाम इस लिस्ट में नहीं है जबकि अप्रैल 2015 में रिलायंस डिफेन्स बनी , फ़्रांस की कंपनी डसाल्ट से एमओयू हुआ , सितम्बर 2016 में आधिकारिक घोषणा होती है ,नागपुर में भूमि पूजन होता है , खूब सारा मीडिया में हल्ला मच जाता है लेकिन रिलायंस डिफेन्स का नाम खुद रक्षा मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में शामिल करने लायक नहीं माना था , इससे यह साफ़ है कि रिलायंस को यह ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट सब नियमो को साइड कर के रातों -रात बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के खुद पीएम मोदी व रक्षा मंत्री के इशारे पर मिला।
उसके बाद अप्रैल 2018 में एक नई डील होती है बुलेट प्रूफ जैकेट 639 करोड़ की , यदि आप दुबारा इस लिस्ट को गौर से देखेंगे तब पता चलेगा कि जिस गुमनाम कम्पनी  एसएमपीपी प्राइवेट लिमिटेड को बुलेट प्रूफ जैकेट का आर्डर दिया गया है ,वो भी इस लिस्ट में शामिल नहीं है।   अब आप इस कंपनी की वेबसाइट पर मौजूद हवा हवाई भारी भरकम दावों को यदि सत्य मानते है तो इस कंपनी का नाम रक्षा मंत्रालय की इस लिस्ट में क्यों नहीं है जबकि सूचि में अन्य कई निजी कम्पनियो को शामिल किया गया है।  इससे यह स्पष्ट होता है कि इस गुमनाम कम्पनी ने सिर्फ मीडिया को गुमराह करने के लिए भारी भरकम फोटो और दावे वेबसाइट पर लगा रखे है यदि हकीकत में कुछ होता तो रक्षा मंत्रालय की 31 मई 2017 वाली लिस्ट में उसका नाम जरूर होता।  और यदि इस कंपनी का नाम बाद में जोड़ा गया है तब सवाल यह है कि आखिर डील एक नौसखिया गुमनाम कंपनी को क्यों दी गई जबकि मिश्र धातु निगम लिमिटेड जैसी मिनी रत्न पीएसयू मौजूद है देश में।  और सबसे बड़ा सवाल आखिर किस एड्रेस पर यह कम्पनी बुलेट प्रूफ जैकेट बना रही है !!! लाइसेंस पर संगरूर लिखा गया है जबकि वेबसाइट पर दिल्ली का पता है।  मौके पर जा कर देखे तो वहां कोई आस -पड़ौस में इस तरह की कंपनी व बुलेट प्रूफ जैकेट बनने का गवाही देता हुआ नहीं मिलता।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s